बीते दिनों के कुछ पल ,
गर बातो ही बातो में ,
याद आ जाए तो समझो ,
तुमे अपनों की याद आती है ,
गर अनायास ही झलक जाए ,
अश्रु आँखों से तो समझो ,
तुम्हे अपनों की याद सताती है ,
किन्ही ओरो की आदतों में ,
झलक जाए किसी की आदत ,
तो समझो उनकी बाते तुममे जिन्दा है ,
भरी भीड़ में न चाहकर भी ,
समझ बैठो खुद को अकेला ,
तो समझो कोई अपना तुम खो चुके हो ,
गेरो की आवाजो कभी लग जाए ,
बहुत ही सुनी सी अपनी सी ,
तो समझो तुम्हारी रूह अब तक ,
उन आवाजो की दीवानी है ,
गर रहो लाख व्यस्त तुम ,
पर हर कम में अपनों की खुसी ढूंढते हो ,
तो समझो तुम्हे अपनों की हर दम ,
फिकर रहती है हर हाल में ,
कुछ पाकर भी कुछ न समझो ,
तो तुम बहुत कुछ खो चुके हो ,
बहुत कुछ होकर भी न दिखाना ,
बहुत कुछ होकर भी कुछ न होना ,
गर यही राह है तुम्हारी तो समझो ,
जिन्दगी कुछ -कुछ जीना ,
तुम्हे आ गया है ,
दूर होकर भी कोई तुम्हारे हरदम ,
गर पास है तो समझो ,
अपनों की कीमत तुम जन चुके हो ,
गर आ निकल पड़े अश्रु -धारा,
अनायास ही तो समझो ,
तुम्हे अपनों की याद बहुत आती है /
------संजय जाटव------
गर बातो ही बातो में ,
याद आ जाए तो समझो ,
तुमे अपनों की याद आती है ,
गर अनायास ही झलक जाए ,
अश्रु आँखों से तो समझो ,
तुम्हे अपनों की याद सताती है ,
किन्ही ओरो की आदतों में ,
झलक जाए किसी की आदत ,
तो समझो उनकी बाते तुममे जिन्दा है ,
भरी भीड़ में न चाहकर भी ,
समझ बैठो खुद को अकेला ,
तो समझो कोई अपना तुम खो चुके हो ,
गेरो की आवाजो कभी लग जाए ,
बहुत ही सुनी सी अपनी सी ,
तो समझो तुम्हारी रूह अब तक ,
उन आवाजो की दीवानी है ,
गर रहो लाख व्यस्त तुम ,
पर हर कम में अपनों की खुसी ढूंढते हो ,
तो समझो तुम्हे अपनों की हर दम ,
फिकर रहती है हर हाल में ,
कुछ पाकर भी कुछ न समझो ,
तो तुम बहुत कुछ खो चुके हो ,
बहुत कुछ होकर भी न दिखाना ,
बहुत कुछ होकर भी कुछ न होना ,
गर यही राह है तुम्हारी तो समझो ,
जिन्दगी कुछ -कुछ जीना ,
तुम्हे आ गया है ,
दूर होकर भी कोई तुम्हारे हरदम ,
गर पास है तो समझो ,
अपनों की कीमत तुम जन चुके हो ,
गर आ निकल पड़े अश्रु -धारा,
अनायास ही तो समझो ,
तुम्हे अपनों की याद बहुत आती है /
------संजय जाटव------
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