मेरी कलम से

नमस्ते इस ब्लॉग पर में हिंदी कविताएं पोस्ट करूंगा. यह कविताएं प्यार,देश प्रेम, खेत खलिहान और मेरे जीवन के अनुभवों पर आधारित है। अगर आपको पसंद आए तो शेयर करे। धन्यवाद

Pages

  • Home
  • Follow on facebook

बुधवार, 28 नवंबर 2012



प्रस्तुतकर्ता Sanjay Jatav पर 10:30 pm
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नई पोस्ट पुरानी पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

Facebook Badge

Sanjay Jatav

Create Your Badge

Popular Posts

  • मेरा गाँव और मेरा बचपन ................
    "मेरे गाँव ने समेटे रखा ,यादो का जहां वो सारा" जन्मा जहाँ और पाया दुलार ढेर सारा , आँखे खुली और देखा जहाँ से संसार यह सारा , ...
  • "कुछ यादे बहुत खास होती है"
    कुछ यादे बहुत खास होती है , जो हर घडी,हर पल मेरे पास होती है , बीते जिन्हें चाहे अरसा हो गया हो , लगता तो येसे है जेसे अभी ही वो पल गया ...
  • "बिन किसीके , यह जग अधुरा लगता है"
    बिन किसीके , यह जग अधुरा लगता है , बिन किसीके , पूर्णिमा का चाँद भी कहा पूरा लगता है , सब कुछ वही तो है , फिर क्यों ? सब कुछ अधुरा ल...
  • "जिन्दगी के इस सफर में"
    बीते दिनों के कुछ पल , गर बातो ही बातो में , याद आ जाए तो समझो , तुमे अपनों की याद आती है , गर अनायास ही झलक जाए , अश्रु आँखों से तो स...
  • "रिश्तो में बस्ती है जिंदगी"
    रिश्तो में  बस्ती है जिंदगी माँ कि गोद में पलती,ममता से सवरती, पिताजी कि ऊँगली थाम,चलना सीखती है जिंदगी | माँ कि आँखों में सँवरता , घर ...
  • "मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रोधोगिकी संस्थान"
    मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रोधोगिकी संस्थान , मध्यप्रदेश का गौरव ,भोपाल की शान , चाचा नेहरु व मौलाना आजाद की स्मृति का निशान , बने जहाँ अभ...
  • "जिन्दगी को समझ सके तो कुछ बात हो"
    जिन्दगी को समझ सके तो कुछ बात हो , जिन्दगी तो हर कोई जी लेता है , इसे समझ पायें तो कुछ बात हो , रिश्ते बनाना आसान है , इसकी कीमत जान सक...
  • गुजरे कल कि हलचल लिखता हूँ
    गुजरे कल कि हलचल लिखता हूँ , सिमटे -बिखरे वो पल लिखता हूँ | कभी-कभी जाकर, अतीत के साये में , फिर वो चंद ,मुलाकात लिखता हूँ | सिमट चुके है ,...
  • "वो दिन क्या गए ,जैसे सबकुछ चला गया हो"
     वो दिन क्या गए ,जैसे सबकुछ चला गया हो  ,   अमावस्या की रात में जैसे चाँद कही खो गया हो , वो हँसी-ख़ुशी के दिन ,वो रूठने मनाने के दिन...
  • "अनोखी जिन्दगी"
    जिन्दगी एक सफ़र है खुद को जानने का, जिन्दगी एक सफ़र है खुद को पहचानने का, जिन्दगी ओ दरिया है जो हर दम बहता है, जिन्दगी ओ अतीत है ज...

Translate

चित्र विंडो थीम. Blogger द्वारा संचालित.