नहीं थके ए नैन ,
अब भी राह ताकते,
तेरा वह स्वप्न ,
हकीकत में ही आकते ,
वो मंजर वो दरिया और वो किनारा ,
धड़कन और सांसो का बस तू ही सहारा,
तेरा वह सपनो में आकर इनको कायल कर देना ,
पल भर में इनमे फिर स्वप्न भर देना ,
चुप्पी साधे होंठो से हंसी बन निखरना,
तेरी नादानी और गलतियों को ,
तेरी उस मासूम हंसी को सुनने ,
तेरे उस बचकाने अंदाज को देखने,
हाँ, नहीं धके ए नैन अब भी राह ताकते .....
-------संजय जाटव-----
अब भी राह ताकते,
तेरा वह स्वप्न ,
हकीकत में ही आकते ,
धड़कन और सांसो का बस तू ही सहारा,
तेरा वह सपनो में आकर इनको कायल कर देना ,
पल भर में इनमे फिर स्वप्न भर देना ,
चुप्पी साधे होंठो से हंसी बन निखरना,
तेरी नादानी और गलतियों को ,
तेरी उस मासूम हंसी को सुनने ,
तेरे उस बचकाने अंदाज को देखने,
हाँ, नहीं धके ए नैन अब भी राह ताकते .....
-------संजय जाटव-----
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