शनिवार, 16 नवंबर 2013

नहीं थके ए नैन

नहीं थके ए नैन ,
अब भी राह ताकते,
 तेरा वह स्वप्न ,
हकीकत में ही आकते , 
वो मंजर वो दरिया और वो किनारा , 
धड़कन और सांसो का बस तू ही सहारा, 
तेरा वह सपनो में आकर इनको कायल कर देना , 
पल भर में इनमे फिर स्वप्न भर देना , 
चुप्पी साधे होंठो से हंसी बन निखरना,
 तेरी नादानी और गलतियों को , 
तेरी उस मासूम हंसी को सुनने , 
तेरे उस बचकाने अंदाज को देखने, 
हाँ, नहीं धके ए नैन अब भी राह ताकते ..... 
                  -------संजय जाटव-----

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